जब अहंकार श्रीकृष्ण को बाँधना चाहता था !
महाभारत में एक ऐसा प्रसंग आता है, जब दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास किया। दुर्योधन को लगा कि सत्ता, सेना और राजशक्ति के बल पर वह श्रीकृष्ण को भी अपने नियंत्रण में ले सकता है। लेकिन श्रीकृष्ण मुस्कुराए। यही मुस्कान इस प्रसंग को केवल महाभारत की घटना नहीं रहने देती, बल्कि इसे हमारे अपने भीतर की यात्रा का प्रतीक बना देती है। दुर्योधन ने कृष्ण को बाँधना चाहा दुर्योधन के भीतर का विश्वास था— “मेरे पास सत्ता है, मेरे पास शक्ति है, इसलिए मैं परिस्थितियों और लोगों को अपने अनुसार नियंत्रित कर सकता हूँ।” यही अहंकार की मूल प्रवृत्ति है। अहंकार कहता है— “सब कुछ मेरे नियंत्रण में होना चाहिए।” जबकि कृष्ण का स्वरूप हमें इसके बिल्कुल विपरीत सत्य की ओर ले जाता है। राजसभा क्या दर्शाती है? इस प्रसंग की राजसभा को हम अपने बाहरी संसार का प्रतीक मान सकते हैं। यह वही संसार है जहाँ मनुष्य अक्सर— पद के पीछे भागता है, प्रतिष्ठा चाहता है, दूसरों पर अपना प्रभाव जमाना चाहता है, अपनी बात मनवाना चाहता है, और परिस्थितियों को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करता है। लेकिन जीवन हमेशा हमारे अनुसार न...