सबसे बड़ी समस्या?
🌸 "मैं" की समाप्ति और "राम" की प्राप्ति 🌸 प्रस्तावना जीवन में सबसे बड़ा बंधन है—"मैं" और "मेरा"। यही अहंकार और ममता हमें दुखों में उलझाए रखते हैं। रामायण का एक प्रसंग हमें यह गूढ़ सत्य सरलता से समझाता है। कथा का प्रसंग वनवास और रावण-वध के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौटे, तो पूरा नगर आनंद में डूबा था। परंतु राजमाता कैकेयी अपराधबोध से व्याकुल थीं। उन्होंने राम से आत्मज्ञान का मार्ग माँगा। राम ने उन्हें सीधे उपदेश न देकर एक अद्भुत अनुभव कराया । भेड़ों का उपदेश श्रीराम ने लक्ष्मण को बुलाया और आदेश दिया, "लक्ष्मण! कल प्रात:काल माता कैकेयी को नगर के बाहर सरयू तट पर ले जाना। वहां जहां भेड़ें (sheep) चरती हैं, वहां माता को खड़ा करना और भेड़ों के मुख से थोड़ा 'उपदेश' सुनवाकर वापस ले आना।" सरयू तट पर खड़ी कैकेयी ने जब भेड़ों की आवाज़ को ध्यान से सुना, तो उन्हें प्रतीत हुआ कि वे निरंतर "मैं-मैं" कह रही हैं। तभी उनके भीतर का पर्दा गिरा और उन्हें समझ आया— • भेड़ जीवन भर "मैं-मैं" करती है, पर अंत में काल का ग्रास बन जाती है।...