तो क्या आप भी इस खोज में हैं…?
भूमिका आज समय की भाग‑दौड़, मन की अशांति, लोगों में बढ़ता क्रोध और दूसरों से नफ़रत—क्या ऐसा ही जीवन हमने अपने लिए चुना है? नहीं। हमारा मन केवल सुख पाने के प्रयासों में लगा रहता है, लेकिन सुख खोजने का रास्ता भटक गया है। हम भौतिक सुखों को पाने के लिए बाहर संसार में दौड़ते रहते हैं। इसके लिए चाहे हमें छोटी‑छोटी खुशियों के पलों को नज़रअंदाज़ करना पड़े, या अपने प्रियजनों के दिल रूपी कलियों को कुचलते हुए आगे बढ़ना पड़े। लेकिन जब पूरा जीवन भागते‑भागते थक जाता है, तब या तो भगवान की शरण नज़र आती है या अध्यात्म की। तो क्या आप भी इस खोज में हैं…? "जब इंसान इस थकान और अशांति से जूझता है, तब उसके मन में प्रश्न उठते हैं—क्या सचमुच मैं ही सब कुछ कर रहा हूँ? क्या जीवन केवल प्रयासों और संघर्षों का नाम है? या कोई और गहरी सच्चाई है, जो इन सबके पार है? यही प्रश्न हमें ध्यान, स्वीकृति और द्रष्टा‑भाव की ओर ले जाते हैं। नीचे दिए गए प्रश्न‑उत्तर इसी यात्रा को उजागर करते हैं।" मुख्य संवाद प्रश्न: "जो करता God को मानता है वही आस्तिक है, जो खुद को करता मानता है वह God को ही नहीं मानता... autom...