क्या सब कुछ एक भ्रम है?
परिचय: एक गहरा प्रश्न क्या सब कुछ एक भ्रम है? अगर आपका जवाब नहीं है, तो क्या आपको लगता नहीं कि सब कुछ बदल जाता है? जो बदलता है, वह अस्थायी है। और जो अस्थायी है, वह भ्रम ही तो है। अगर आपका जवाब हाँ है, तो बधाई हो! आप वहाँ पहुँच चुके हैं जहाँ हम आपको ले जाना चाहते हैं। इस प्रश्न से साफ झलकता है—चाहे जवाब हाँ हो या ना, भ्रम ही ज्ञान की सीढ़ी है। भ्रम वह अवस्था है जहाँ आपके अंदर का अंधकार मिटता है और केवल प्रकाश रह जाता है। यहाँ आप समझते हैं कि भ्रम कोई शत्रु नहीं, बल्कि ज्ञान तक पहुँचने का मार्ग है। मुख्य प्रश्न: अगर भ्रम ही ज्ञान तक ले जाता है, तो क्या भ्रम से डरना चाहिए? उत्तर: नहीं। भ्रम केवल अज्ञान की छाया है। जब आप इसे स्वीकार करते हैं और भीतर झाँकते हैं, तो वही भ्रम ज्ञान का द्वार बन जाता है। ज्ञान की पहचान आप भ्रम को समस्या नहीं, बल्कि अवसर मानते हैं। हर प्रश्न अब उत्तर की ओर ले जाता है। चेतना स्थिर प्रकाश बन जाती है। आपका जीवन पूर्ण स्पष्टता में बहने लगता है। व्यावहारिक अभ्यास: भ्रम का निरीक्षण जब कोई उलझन आए, उसे दबाएँ नहीं। इसे देखें और लिखें: “यह मुझे क्या सिखा रही है?” ज...